जलवायु

 भारत में उष्णकटिबंधीय विभोक्ष जलवायु परिवर्तन में बड़ी भूमिका निभाते हैं। यह बंगाल की खाड़ी एवं अरब सागर में उत्पन्न होते हैं और भारतीय उपमहाद्वीप के कई महत्वपूर्ण भागों को प्रभावित करते हैं। इनमे से ज्यादातर चक्रवात बंगाल की खाड़ी में पैदा होते हैं और दक्षिणी पश्चिमी मानसून के जलवायु को प्रभावित करते हैं।

 अगर जलवायु अनुकूल है तो वह देश विकास की सीढि़यां चढ़ता जाता है। भारत की जलवायु विविधतापूर्ण है। यहां एक स्थान से दूसरे स्थान में तथा एक ऋतु से दूसरी ऋतु में तापमान व वर्षा की मात्रा में काफी अंतर है। अत्यधिक प्रादेशिक भिन्नता भारत की जलवायु की विशेषता है क्योंकि ऐसी जलवायु विश्व में कहीं नहीं मिलती।
इसको हम इस तरह समझ सकते हैं, जैसे असम में भारी वर्षा होती है, क्‍योंकि वहां की जलवायु आर्द्र है। वहीं राजस्थान में कम वर्षा होने का कारण यहां की जलवायु शुष्क होना है। पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थलों में जहां ग्रीष्मकाल में दिन का तापमान 50° सेल्सियस तक पहुंच जाता है वहीं शीत ऋतु में जम्मू-कश्मीर में स्थित द्रास एवं कारगिल में तापमान शून्य से 40 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है। इसी तरह जहां मेघालय के मॉसिनराम व चेरापूंजी एवं असम में 900 से 1000 सेमी. तक वर्षा होती है, वहीं उसी अवधि में राजस्थान के जैसलमेर आदि क्षेत्रों में सिर्फ 10 से 12 सेमी. ही वर्षा होती है।
भारत में जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक व विशेषताएं



अक्षांश
भारत के मध्‍य से होकर कर्क रेखा गुजरती है, जिसके कारण क्षेत्र का तापमान सापेक्षतया अधिक रहता है। मैदानी क्षेत्र भी 32°उ. अक्षांशों के अंतर्गत ही स्थित है।

मानसूनी हवाएं
भारत में मानसूनी हवाएं ग्रीष्मकाल के दौरान दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहती हैं व शीत काल में इनके बहने की दिशा उत्तर-पूर्व हो जाती है। ये मानसूनी हवाएं वर्षा की मात्रा, आर्द्रता व तापमान को प्रभावित करती हैं।

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